किसका रस्ता देखे,ऐ दिल ऐ सौदाई

किसका रस्ता देखे,ऐ दिल ऐ सौदाई
किसका रस्ता देखे,ऐ दिल ऐ सौदाई

मीलों है खामोशी,बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की,तुझे भी मुझे भी,
फिर क्यूँ आँख भर आई
हो किसका रस्ता देखे ऐ दिल ऐ सौदाई

कोई भी साया नहीं राहों में,कोई भी आएगा ना बाहों में
तेरे लिए मेरे लिए,कोई नहीं रोने वाला, हो
झूठा भी नाता नहीं चाहूँ मैं,तू ही क्यूँ डूबा रहे आहों में
कोई किसी संग मरे,ऐसा नहीं होने वाला
कोई नहीं जो यूं ही जहाँ में,बांटें पीर परायी
हो,किसका रस्ता देखे,ऐ दिल ऐ सौदाई

तुझे क्या बीती हुई रातों से,मुझे क्या खोई हुई बातों से
सेज नहीं चिता सही,जो भी मिला सोना होगा,हो
गयी जो डोरी छूती हाथों से,लेना क्या टूटे हुए साथों से
ख़ुशी जहां मांगी तूने,वहीँ मुझे रोना होगा
ना कोई तेरा ना कोई मेरा, फिर किसकी याद आई

हो किसका रस्ता देखे,ऐ दिल ऐ सौदी
मीलों है खामोशी,बरसों है तन्हाई
भूली दुनिया कभी की तुझे भी
मुझे भी फिर क्यूँ आँख भर आई

खर्ची – by Gulzar

मुझे खर्ची में पूरा एक दिन, हर रोज़ मिलता है
मगर हर रोज़ कोइ छीन लेता है,
झपट लेता है अण्टी से!

कभी खीसे से गिर पढ़ता है तो गिरने की
आहट भी नहीं होती,
खरे दिन को भी मैं खोटा समझ के भूल जाता हूं!

गिरेबान से पकड़ के मांगने वाले भी मिलते हैं
“तेरी गुज़री हुई पुश्तों का कर्ज़ा है,
तुझे किश्तें चुकानी हैं–”

ज़बर्दस्ती कोई गिरवी भी रख लेता है, ये कह कर,
अभी दो चार लम्हे खर्च करने के लिये रख ले,
बक़ाया उम्र के खाते में लिख देते हैं,
जब होगा, हिसाब होगा

बड़ी हसरत है पूरा एक दिन, इक बार मैं
अपने लिये रख लूं

तुम्हारे साथ पूरा एक दिन, बस खर्च करने कि तमन्ना है!!

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनिया
ये इन्सान के दुश्मन समाजों की दुनिया
ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

यहाँ इक खिलौना है इन्सान की हस्ती
ये बस्ती है मुर्दा परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

ये दुनिया जहां आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं दोस्ती कुछ नहीं है
यहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

जला दो इसे फूँक डालो ये दुनिया
मेरे सामने से हटालो ये दुनिया
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है